लखीमपुर: जिला खीरी में पांच वर्ष पहले बेसिक शिक्षा विभाग Basic shiksha vibhag में सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित हुए शिक्षामित्रों shikshamitra का समायोजन निरस्त होने के बाद शासन के आदेशानुसार जारी हुआ छह दिन का बकाया वेतन नहीं मिल पाया।

जिले के ब्लाक पलिया, धौरहरा, ईसानगर सहित करीब आधा दर्जन ब्लाकों में तैनात शिक्षामित्रों को लेखा अधिकारी की अनदेखी भारी पड़ गई।

वहीं अन्य ब्लाकों के शिक्षामित्रों का बकाया वेतन समायोजन samayojan निरस्त होने के कुछ माह बाद ही जारी कर दिया गया था। जिम्मेदार शिक्षामित्रों को शासन द्वारा सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती के दौरान का बकाया छह दिनों का वेतन पांच वर्ष गुजर जाने पर भी नहीं दिला सके। इस बीच कुछ जिम्मेदारों ने जुबानी जंग छेड़कर उल्टे ही इनपर तमाम आरोप प्रत्यारोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ते हुए पांच साल गुजार दिए।

अगस्त 2014 में अखिलेश सरकार Akhilesh Yadav द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में तैनात शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित कर दिया गया था। पर कानूनी पचड़े में 25 जुलाई 2017 को सभी का समायोजन सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान निरस्त हो गया। जिसका वेतन इन सभी को 25 जुलाई तक तत्काल देकर एक अगस्त 2017 से पूर्व पद पर वापस भेजकर 10 हजार के मानदेय पर लगा दिया गया। इस दौरान संगठन की मांग पर प्रदेश स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने इन सभी को 31 जुलाई तक सहायक अध्यापक पद का वेतन देने का आदेश दे दिया था।

जिसमें बकाया छह दिनों का वेतन देने के लिए विभाग की मांग पर स्कूल के अध्यापक उपस्थिति पंजिका के अनुसार प्रधानाध्यापकों से शिक्षामित्रों shikshamitra की उपस्थिति प्रमाणित करवाकर एनपीआरसी व खंड शिक्षा अधिकारी की जांच आख्या के बाद सभी के उपस्थिति पत्र लेखा अधिकारी कार्यालय में भेज दिया गया। जिसमें जिले के लगभग नौ ब्लाकों के शिक्षामित्रों को छह दिन का बकाया वेतन जारी कर दिया गया था। वहीं धौरहरा, ईसानगर समेत अन्य बचे ब्लाकों के शिक्षामित्रों का बकाया लाखों रुपया विभागीय हीलाहवाली के चलते आज भी नहीं मिल सका। जिसको पाने के लिए शिक्षामित्रों ने दर्जनों बार अपनी उपस्थिति हेड मास्टर से प्रमाणित करवाकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के माध्यम से लेखा कार्यालय में जमा करवा तो दिया पर पांच वर्ष पूरे होने के बावजूद भी आज तक लेखाधिकारी कार्यालय व विभागीय कार्यालयों में बैठे जिम्मेदारों ने इनका बकाया वेतन जारी करवाना मुनासिब नहीं समझा।

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