लखनऊ : परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से बाल्यावस्था अवकाश, चयन वेतनमान को एसीपी का लाभ देने और स्कूलों को मान्यता देने में घूस लेने वाले 25 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) व छह लिपिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति की जांच की जाएगी।

भ्रष्टाचार निवारण संगठन के एडीजी राजा श्रीवास्तव से महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने गोपनीय पत्र भेजकर जांच कराने की सिफारिश की है। सूत्रों ने बताया कि शिक्षकों से मिली शिकायतों की जांच में आरोप सही पाने के बाद यह कदम उठाया गया है।

सरकार की जीरो टालरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम कराने के लिए घूस न देनी पड़े इसके लिए विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से प्रत्येक ब्लाक में शिक्षकों से काल सेंटर के माध्यम से बात की गई। नाम गोपनीय रखा गया और उनसे फीडबैक लिया गया कि क्या विभागीय सेवाओं के नाम पर उनसे धन की अनुचित मांग की जाती है, क्या घूस न देने पर उनका शोषण किया जाता है और क्या सेवाओं में कटौती की जाती है। शिक्षकों के आरोपों को क्रासचेक करने के लिए विभाग ने गोपनीय जांच की तो उसमें भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। इनकी संपत्ति आय से कहीं अधिक है।

जिन 25 बीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोप की जांच होगी उनमें अंबेडकर नगर के हरि गोविंद सिंह, अमेठी के शैलेन्द्र सिंह, आजमगढ़ के संतोष कुमार तिवारी व राजेश कुमार, बागपत के विजेन्द्र कुमार, बरेली के अवनीश कुमार व शशांक शेखर मिश्रा, भदोही के आशीष मिश्रा, गौतमबुद्ध नगर के अजहर आलम व प्रवीन, गोरखपुर के प्रभात श्रीवास्तव, चंद्र शेखर चौरसिया व श्रीनारायण मिश्रा, जौनपुर के अविनाश सिंह, कुशीनगर के अनिल कुमार मिश्रा, मथुरा की नीतू, मऊ के बलिराम, गाजीपुर के सावन दुबे, मेरठ के राहुल धामा, प्रयागराज के कैलाश सिंह, विनोद मिश्रा, राजीव प्रताप सिंह व राजेश यादव और मथुरा के जितेन्द्र सिंह शामिल हैं।

जिन छह लिपिकों पर घूस लेने का आरोप है उनमें हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा व कनिष्ठ लिपिक प्रवीन मिश्रा, महाराजगंज बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ सहायक यशवंत सिंह, प्रयागराज में बेसिक शिक्षा निदेशालय के कनिष्ठ सहायक अभ्युदय शुक्ला, बीएसए लखीमपुर कार्यालय के वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा और सहारनपुर के जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के कनिष्ठ सहायक परिश्रम सैनी शामिल हैं।

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